पैंगोलिन : कोरोना-विषाणु का एक मध्यवर्ती संवाहक?

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Pangolins

Thumbnail image:  Pixabay

 

हाल ही में Nature शोध पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में दक्षिणी चीन के मलाया पैंगोलिन्स में एक कोरोना विषाण पाया गया जो SARS -CoV-2 से संबंधित है। नवीन SARS-CoV-2 कोरोना विषाणु के प्रसार को वुहान में उपस्थित ह्वानान समुद्री खाद्य पदार्थ की मंडी से जोड़ा जा रहा है। इससे पहले, २००२ के SARS प्रकोप को भी इसी तरह के आर्द्र नमी वाले बाजारों से जोड़ा गया था. वुहान के आर्द्र समुद्री खाद्य पदार्थों की मंडी को इस प्रकोप के तुरंत बाद खाली करा दिया गया था जिसने इस विषाणु की उत्पत्ति की खोज को और भी चुनौती पूर्ण बना दिया। हालांकि, चमगादड़ों को इस नवीन विषाणु का वास्तविक स्रोत माना जाता है, विषाणुओं का मनुष्यों में प्रसार किसी मध्यवर्ती संवाहक जीव से भी हो सकता है।
 
पैंगोलिन्स, वैश्विक स्तर पर अवैध-रूप से सबसे ज्यादा तस्करी किए जाने वाले स्तनधारियों में से एक हैं। इनका उपयोग भोजन के स्रोत और पारम्परिक दवाइयों में किया जाता है. SARS-CoV-2 से सम्बंधित कोरोना विषाणु की पहचान चमगादड़ों में हो चुकी है लेकिन इसी प्रकार के विषाणुओं को अन्य किसी वन्य-जीवों की प्रजातियों में नहीं पहचाना जा सका है।

यह जानने के लिए कि क्या कोरोना-विषाणु अन्य स्तनधारियों में भी उपस्थित है, हॉन्ग-कॉन्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दक्षिणी चीन के पैंगोलिन्स के RNA अनुक्रम का अध्ययन किया। उन्होंने १८ मलायन पैंगोलिन्स के उन संरक्षित उत्तक के नमूनों का प्रयोग किया जो २०१७ के अंत और २०१८ की शुरुआत में हुई तस्करी विरोधी कार्रवाईयों के दौरान ग्वांगक्जी के कस्टम अधिकारियों को मिले थे।
 

RNA के अनुक्रमण (सिक्वेंसिंग) ने दर्शाया कि ४३ में से ६ नमूनों में कोरोना विषाणु उपस्थित था, लेकिन इस प्रक्रिया में नमूनों के संपूर्ण RNA अनुक्रम को प्राप्त नहीं किया जा सका। विषाणु के ज्ञात जीनोम्स पर आधारित प्रायोगिक पद्धति का उपयोग कर, शोधकर्ताओं ने सभी ६ नमूनों से कोरोना-विषाणु के जीनोम के संपूर्ण अनुक्रम को वर्धित किया। ऐसा पाया गया कि ये कोरोना-विषाणु SARS-CoV-2 से निकटतम रूप से सम्बंधित थे।

इन ६ जीनोमिक अनुक्रमों के आधार पर, वैज्ञानिकों ने २०१८ के मध्य में ग्वांगक्जी और २०१९ की शुरुआत में ग्वांग्ज़्हु से एकत्रित किए गए पैंगोलिन उत्तकों के अभिलेखित नमूनों का परीक्षण किया।

इन सब नमूनों के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने पाया कि पैंगोलिन के कोरोना-विषाणुओं और नवीन SARS-CoV-2 के अनुक्रमों के मध्य ८५.५% से ९२.४ % समानता है और ये कोरोना विषाणुओं के २ जीनीरूप से विशिष्ट उप-वंशावली का प्रतिनिधित्व करते हैं। चकित करने वाली बात यह थी कि विषाणु का वह प्रोटीन जो मानव कोशिकाओं से एक ग्राही द्वारा बँधता है, में पैंगोलिन के विषाणुओं के एक समूह और मानव के SARS-CoV-2 के मध्य ९७.४ % समानता पाई गई।
 

ये परिणाम हमें यह बताते हैं कि मध्यवर्ती आतिथेय जंतु जैसे की पैंगोलिन्स, मानवों में इस विषाणु के प्रसार में लिप्त हो सकते हैं। केवल पैंगोलिन्स और चमगादड़ हीं ऐसे स्तनधारी जीव हैं जो SARS-CoV-2 से सम्बंधित कोरोना-विषाणु से संक्रमित होते हैं. इसमें अभी भी संदेह है कि पैंगोलिन्स में संक्रमण चमगादड़ों से आया या कोई अन्य जीव, जिसे अभी पहचाना नहीं जा सका है, भी इसमे सम्मिलित है। जब तक हम विषाणुओं के प्रसार के सही क्रम को नही समझ जाते पैंगोलिन्स की सटीक भूमिका एक रहस्य ही बनी रहेगी।
 
लेखिका के विषय में: अदिति करमाकर टाटा मूलभूत शोध संस्थान, मुंबई की एक भूतपूर्व छात्रा हैं और अभी एक औषधीय कम्पनी से सम्बद्ध हैं | आप चिकित्सा सम्बन्धी विषयो पर लिखती हैं तथा अपने खाली समय में विज्ञान विषय की स्वतंत्र लेखिका भी हैं।